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रंडी की रक्षा बंधन
🙅🙅"रंडी की रक्षा-बंधन""🙅🙅
हां यही तो वह कठोर शब्द था जिसे उसके कानों को सुनने की अब आदत पड़ गई थी।
यह शब्द उसके कानों में एक गाली की तरह पड़ता था पर क्या करें बेचारी?
अपने हाथ की हथेली गरम करने के लिए उसे पता नहीं क्या-क्या गर्म करना पड़ता था।
आखिर कसूर क्या था उसका वो तो स्कूल पढ़ने लिखने के लिए जाती थी
उसे ज़िन्दगी में बहुत बड़ा जो बनना था,,,
पर एक दिन,,,,
एक दरिंदे ने स्कूल के रास्ते से उसे उठा कर बलात्कार कर दिया ओर ले जाकर कोठे पर बेच दिया।
तब से ना जाने कितने शहरो के कोठो ओर होटलों में जिस्म के भेड़ियों की भूख मिटा चुकी है "नंदिता",,,
वह रोजाना गुड़िया की तरह तैयार होती।
खूब सजती संवरती
लाली लिपस्टिक लगाकर होटों को अच्छे से लाल करती,
ओर रात को एक पल में ही कोई हवस का शिकारी शिकार कर चला जाता।
पर आज वो लेट से उठी
आंखो के नीचे का हिस्सा सूजा हुआ रहा
शायद रात को खूब रोई थी बेचारी।
रात को बेल्टो से मार जो पड़ी थी,,,
ओर पड़ती भी क्यों नहीं?
ग्राहक के साथ सोने के लिए जो मना कर दिया था।
पर आज उसे उस दर्द का अहसास नहीं हो रहा था
उसके चेहरे पर एक विजय की भावना नजर आ रही थी
क्यों की आज "रक्षा-बंधन" का त्यौहार था।
ओर
रात को वापस लौटने वाला ग्राहक उसका "भाई" जो था।।
ओर शायद यही उसकी अपने भाई के लिए "सच्ची राखी" थी।
(मुसाफ़िर जयपुरिया)
Insta- vinod_nagarr
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Yarr Pajeet kitni (auto-excised) rakhsa krega. Kek


















































